पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद खनिज धूल की मात्रा 2003 से 2023 के बीच लगभग 10% कम हुई है। Science Advances में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, अफ्रीका और एशिया—दुनिया के प्रमुख धूल स्रोत क्षेत्रों—दोनों में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई। वैज्ञानिकों ने उपग्रहों, जमीनी माप और वायुमंडलीय मॉडल से प्राप्त आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण किया। वायुमंडलीय धूल सूर्य के प्रकाश को परावर्तित कर कुछ शीतलन प्रभाव पैदा कर सकती है और बादलों तथा वर्षा को भी प्रभावित करती है। अध्ययन के अनुसार, धूल में कमी से 2003 से 2023 के दौरान लगभग +0.02 W/m² का सकारात्मक radiative forcing पैदा हुआ। इसका मतलब है कि वायुमंडल में धूल की कमी ने इस अवधि में हुई वार्मिंग में मामूली योगदान दिया हो सकता है। हालांकि, जलवायु पर धूल का कुल प्रभाव अभी पूरी तरह निश्चित नहीं है, क्योंकि इसके शीतलन और वार्मिंग दोनों तरह के प्रभाव हो सकते हैं।
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