भारत अपनी वायु सुरक्षा और हवाई निगरानी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के लिए छह अतिरिक्त NETRA MK-1A एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान शामिल करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इन विमानों के शामिल होने से देश की लंबी दूरी तक हवाई गतिविधियों की निगरानी, संभावित खतरों की समय रहते पहचान और युद्धक्षेत्र में कमांड एवं कंट्रोल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। NETRA MK-1A जैसे AEW&C विमान आधुनिक रडार और सेंसर प्रणालियों से लैस होते हैं, जो दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई गतिविधियों का दूर से पता लगाने तथा सैन्य अभियानों का बेहतर समन्वय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रस्तावित विस्तार से भारत की मौजूदा EMBRAER आधारित AEW&C क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे देश अपनी दोनों संवेदनशील सीमाओं पर अधिक प्रभावी और लगातार निगरानी रख सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रणालियों में गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित उन्नत रडार तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे रडार की क्षमता, लक्ष्य पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और निगरानी की सटीकता पहले की तुलना में और बेहतर होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय वायुसेना को भविष्य की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली के अनुरूप तैयार करने, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने और देश की समग्र वायु रक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यह परियोजना भारत की रक्षा आधुनिकीकरण और **आत्मनिर्भर रक्षा** के लक्ष्य को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
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