भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन कार्यक्रम कावेरी को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, कावेरी 2.0' परियोजना लगभग 70 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और इसका वर्तमान प्रोटोटाइप आफ्टरबर्नर परीक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है। कावेरी इंजन कार्यक्रम की शुरुआत लगभग 43 वर्ष पहले देश में स्वदेशी टर्बोफैन इंजन विकसित करने के उद्देश्य से की गई थी, ताकि भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि, आवश्यक थ्रस्ट, वजन और प्रदर्शन मानकों को पूरा करने में तकनीकी चुनौतियों के कारण वर्ष 2008 में मूल परियोजना को रोक दिया गया था। अब आधुनिक तकनीकों, उन्नत सामग्रियों और संशोधित डिजाइन के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नए रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक स्वदेशी टर्बोफैन इंजन को तेजस लड़ाकू विमान के साथ एकीकृत करना है। यदि यह लक्ष्य सफल होता है, तो भारत को लड़ाकू विमान इंजन जैसी अत्यंत जटिल और रणनीतिक तकनीक में आत्मनिर्भरता मिलेगी, रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता घटेगी और भविष्य के स्वदेशी लड़ाकू विमानों तथा उन्नत रक्षा परियोजनाओं के विकास को भी नई गति मिलेगी। कावेरी 2.0 की सफलता भारत के आत्मनिर्भर भारत'और मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है तथा देश को विश्व के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित कर सकती है जो अत्याधुनिक सैन्य विमान इंजनों के विकास और निर्माण की क्षमता रखते हैं।
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