अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चालू वित्त वर्ष में सात अंतरिक्ष प्रक्षेपणकरने के लक्ष्य के साथ अपने अब तक के सबसे व्यस्त अभियानों में से एक की तैयारी कर रहा है। यह अभियान भारत की अंतरिक्ष क्षमता को मानव अंतरिक्ष उड़ान, उन्नत उपग्रह प्रक्षेपण, रणनीतिक अंतरिक्ष सेवाओं, वाणिज्यिक मिशनों और नई तकनीकों के प्रदर्शन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन मिशनों में गगनयान कार्यक्रम न्नत संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का प्रक्षेपण, नई अंतरिक्ष तकनीकों के परीक्षण तथा विभिन्न रणनीतिक और व्यावसायिक परियोजनाएं शामिल हैं। लगातार प्रक्षेपणों के माध्यम से ISRO अपनी तकनीकी विश्वसनीयता, परिचालन क्षमता और भविष्य के जटिल अंतरिक्ष अभियानों की तैयारियों को और मजबूत करेगा। इसके साथ ही भारत की बढ़ती प्रक्षेपण क्षमता देश को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने, निजी अंतरिक्ष उद्योग को प्रोत्साहन देने और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए विश्वसनीय एवं किफायती प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ISRO की यह रणनीति भारत को अंतरिक्ष विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर तकनीक के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाएगी तथा देश को वैश्विक स्पेस सेक्टर में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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