भारत अपनी रक्षा और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। रक्षा मंत्रालय की एयरशिप-बेस्ड हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) परियोजना लगभग ₹15,000 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य ड्रोन और उपग्रहों के बीच मौजूद निगरानी अंतर को दूर करना है। इस अत्याधुनिक प्रणाली में सौर ऊर्जा से संचालित हीलियम एयरशिप का उपयोग किया जाएगा, जो लगभग 20 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर लंबे समय तक लगातार उड़ान भरते हुए निगरानी करने में सक्षम होगी। यह प्लेटफॉर्म वास्तविक समय (रियल-टाइम) में सीमाओं, समुद्री क्षेत्रों, संवेदनशील सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों की लगातार निगरानी कर सकेगा, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को समय पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। यह तकनीक पारंपरिक ड्रोन की तुलना में अधिक समय तक हवा में रह सकती है और उपग्रहों की तुलना में कम लागत पर निरंतर निगरानी उपलब्ध करा सकती है। रक्षा मंत्रालय इस परियोजना में निजी कंपनियों की भागीदारी और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहा है, जिससे स्वदेशी रक्षा उद्योग को नई गति मिलेगी। वहीं, डीआरडीओ (DRDO) द्वारा वर्ष 2025 में किए गए सफल परीक्षणों ने इस तकनीक की व्यवहारिक क्षमता को भी प्रमाणित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि AS-HAPS जैसी स्वदेशी तकनीक भारत की सीमाओं की सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आपदा प्रबंधन, संचार सहायता और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी। साथ ही यह परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' और **'मेक इन इंडिया' अभियान को मजबूती देते हुए रक्षा क्षेत्र में विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने और भारत को उन्नत रक्षा तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।
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