भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (NAL) द्वारा विकसित स्वदेशी SARAS MK-2 विमान का डिजाइन एवं विकास कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। 19-सीटर इस नागरिक विमान की डिजाइन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब इसे प्रोटोटाइप निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही स्वदेशी HANSA-3-NG प्रशिक्षण विमान भी बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार किया जा रहा है। इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य भारत की घरेलू विमान निर्माण क्षमता को मजबूत करना, क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करना और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है। इन परियोजनाओं से देश में एयरोस्पेस अनुसंधान, विमान निर्माण, उन्नत तकनीकी विकास और नवाचार को नई गति मिलेगी। साथ ही कुशल मानव संसाधन का विकास होगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और विमान निर्माण उद्योग को मजबूती मिलेगी। यह पहल भारत को वैश्विक एयरोस्पेस क्षेत्र में एक उभरती हुई विनिर्माण शक्ति के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
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