तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार की विकसित भारत गारंटी' योजना के वर्तमान स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि इसे मौजूदा वित्तीय साझेदारी (Fund Sharing Pattern) के अनुसार लागू किया गया, तो राज्य पर लगभग ₹5,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से योजना के फंडिंग मॉडल पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्यों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं के अनुसार योजना लागू करने की अधिक स्वतंत्रता और लचीलापन मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रत्येक राज्य की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक चुनौतियाँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए सभी राज्यों पर एक समान वित्तीय ढांचा लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के अनुरूप ऐसा वित्तीय मॉडल अपनाने की आवश्यकता बताई, जिससे विकास योजनाओं का प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन हो सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि राज्यों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ डाला जाएगा, तो अन्य महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से मुख्यमंत्री की इस मांग या फंड शेयरिंग मॉडल में किसी संभावित बदलाव को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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