देश में मानसून की धीमी शुरुआत ने खरीफ सीजन की खेती पर चिंता बढ़ा दी है। 29 जून 2026 तक सामान्य से लगभग 33% कम बारिश दर्ज होने के कारण 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 23% पीछे चल रही है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसान धान, सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई टाल रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल 50.457 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी मौजूद है, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 27.49%है। यह मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में कम है, हालांकि पिछले 10 वर्षों के औसत से बेहतर बनी हुई है। क्षेत्रीय स्तर पर मध्य और उत्तरी भारत के जलाशयों में अपेक्षाकृत बेहतर जल भंडारण है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में पानी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम है। नदी बेसिनों में गंगा, सिंधु, नर्मदा और गोदावरी जैसी नदियों में जल भंडारण सामान्य से बेहतर है, लेकिन कावेरी और कुछ पूर्वी नदी बेसिनों में पानी की कमी बनी हुई है। ऐसे में किसानों की उम्मीद अब जुलाई के मानसून पर टिकी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों में गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में सामान्य से अच्छी वर्षा होती है, तो खरीफ बुवाई में हुई शुरुआती देरी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है और किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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