रामगढ़ कैंट, झारखंड। स्वदेशी जागरण मंच, रामगढ़ कैंट शाखा द्वारा सत्र 2026-28 के अंतर्गत एक विचार गोष्ठी का आयोजन ज्ञान मंदिर विद्यालय, परसोतिया परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के संस्थापक श्री ब्रह्मानंद पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संयोजक श्री मृणाल राठौर ने की, जबकि मंच संचालन प्रोफेसर पिंकी कुमारी ने किया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क्षेत्र संयोजक श्री अमरेंद्र सिंह, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय परिषद सदस्य श्री मनोज सिंह, प्रांत सह-संयोजक श्री आलोक सिंह, प्रांत पूर्णकालिक श्री हिमांशु शेखर तथा रांची जिला संयोजक सुश्री आंचल तिवारी सहित मंच के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया गया।अपने उद्बोधन में प्रांत सह-संयोजक श्री आलोक सिंह ने “कम में अधिक” के सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” की चर्चा की। उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है और प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने त्यागपूर्वक उपभोग की भावना अपनाने तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। राष्ट्रीय परिषद सदस्य श्री मनोज सिंह ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ऊर्जा बचत एवं हरित जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए ईंधन की बचत राष्ट्रीय हित के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने सौर एवं पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता बताई।मुख्य अतिथि श्री अमरेंद्र सिंह ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच की जिला इकाई केवल कार्यक्रम आयोजित करने वाली इकाई नहीं, बल्कि स्वदेशी विचार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाली कार्यशाला है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दायित्ववान यदि अपने दायित्व को साधना मानकर कार्य करे तो जिला संगठन सशक्त होगा और स्वदेशी का राष्ट्रव्यापी अभियान सफल होगा। उन्होंने कहा, “संगठन की शक्ति कार्यकर्ता में है, कार्यकर्ता की शक्ति विचार में है और विचार की शक्ति दायित्वपूर्ण आचरण में है।” उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वदेशी विचार को जन-जन तक पहुंचाने तथा आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। वक्ताओं ने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सांस्कृतिक स्वाभिमान, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक समृद्धि से जुड़ा विषय है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे तथा विदेशी वस्तुओं पर अनावश्यक निर्भरता कम करे, तो भारत आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं एवं सदस्यों ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, जल एवं ऊर्जा संरक्षण, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरण फैलाने का संकल्प लिया। अध्यक्षीय संबोधन में श्री मृणाल राठौर ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रेम कुमार, बेनु गोपाल, प्रहलाद प्रसाद सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता रही।
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