12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 से पहले देशभर में योग को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए 6 लाख से अधिक संगठनों ने पंजीकरण कराया है। यह रिकॉर्ड भागीदारी दर्शाती है कि योग अब केवल एक स्वास्थ्य अभ्यास नहीं, बल्कि जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। योग दिवस के अवसर पर देशभर में विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न समुदायों द्वारा सामूहिक योग सत्र, जागरूकता अभियान और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य योग को प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जागरूकता पैदा करना है। पिछले कुछ वर्षों में योग की लोकप्रियता भारत सहित पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ी है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग लोगों को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने का प्रभावी मार्ग प्रदान कर रहा है। नियमित योगाभ्यास से शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मकता का विकास होता है। यही कारण है कि युवा, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में योग कार्यक्रमों से जुड़ रहे हैं। इस वर्ष लाखों संगठनों की भागीदारी यह संकेत देती है कि योग स्वस्थ भारत के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। स्वदेशी एवं आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य उपहार है। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि संतुलित, अनुशासित और स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण जीवन पद्धति है। यह व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर उसे अधिक सक्षम और जागरूक बनाता है। योग के माध्यम से स्वस्थ नागरिक, सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है। आज जब विश्व समुदाय भारतीय योग परंपरा को अपना रहा है, तब यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति, वैश्विक प्रतिष्ठा और आत्मनिर्भरता के संदेश को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
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