केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा है कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र अब देश का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन चुका है और इसका अगला लक्ष्य दूसरे स्थान तक पहुंचना है। उन्होंने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के आकार तक पहुंच गया है, जो देश के औद्योगिक और तकनीकी विकास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मंत्री ने यह बात Jabil की नई उन्नत विनिर्माण सुविधा के उद्घाटन अवसर पर कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, निर्यात, निवेश और रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे देश वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। भारत में मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर उपकरण, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक घटकों के उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी सरकारी योजनाओं, बेहतर अवसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियों ने वैश्विक कंपनियों को भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी और मजबूत विनिर्माण पारितंत्र भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला का एक प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। इससे न केवल विदेशी निवेश बढ़ रहा है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। स्वदेशी एवं आत्मनिर्भर भारत का संदेश:** इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सफलता का सशक्त उदाहरण है। स्वदेशी विनिर्माण, अनुसंधान, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देकर भारत आयात पर निर्भरता कम कर रहा है तथा वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात के अग्रणी केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह प्रगति देश की आर्थिक मजबूती, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करते हुए भारत को विश्व की प्रमुख विनिर्माण शक्तियों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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